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mahabharat 7.192.15-16h: युधिष्ठिर की यह आज्ञा पाकर संजय ने पूरी सतर्कता के साथ महारथी द्रोणाचार्य को मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.192.15-16h 
युधिष्ठिरसमाज्ञप्ता: सृञ्जयानां महारथा:॥ १५॥
अभ्यद्रवन्त संयत्ता भारद्वाजजिघांसव:।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर की यह आज्ञा पाकर संजय ने पूरी सतर्कता के साथ महारथी द्रोणाचार्य को मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण कर दिया।
 
On receiving this command from Yudhishthira, Sanjaya, with full alertness, attacked the great warrior Dronacharya with the desire to kill him. 15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)