श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.192.13 
एषो हि पार्षतो वीरो भारद्वाजेन संगत:।
घटते च यथाशक्ति भारद्वाजस्य नाशने॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह वीर द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्रोणाचार्य से युद्ध कर रहा है और उन्हें नष्ट करने के लिए हर संभव प्रयत्न कर रहा है॥13॥
 
This brave Dhrishtadyumna, the son of Drupada, is fighting with Dronacharya and is doing everything in his power to destroy him.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)