श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  7.192.11-12 
वर्तमाने तथा युद्धे घोरे देवासुरोपमे॥ ११॥
अब्रवीत् क्षत्रियांस्तत्र धर्मराजो युधिष्ठिर:।
अभिद्रवत संयत्ता: कुम्भयोनिं महारथा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं और दानवों के बीच युद्ध के समान वह भयंकर युद्ध चल रहा था, तब धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने पक्ष के क्षत्रिय योद्धाओं से कहा - 'महारथियो! तुम सब लोग पूरी तरह सतर्क होकर द्रोणाचार्य पर आक्रमण करो।'
 
When that fierce battle was going on, like a war between gods and demons, Dharmaraja Yudhishthira said to his side's Kshatriya warriors - 'Maharathis! All of you be fully alert and attack Dronacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)