श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.192.1 
संजय उवाच
सात्वतस्य तु तत् कर्म दृष्ट्वा दुर्योधनादय:।
शैनेयं सर्वत: क्रुद्धा वारयामासुरञ्जसा॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! सात्वतवंशी सात्यकि का वह कार्य देखकर दुर्योधन आदि कौरव योद्धा क्रोधित हो उठे और उन्होंने अनायास ही शिनि के पौत्र को चारों ओर से घेर लिया॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! Seeing that action of Satyaki of Satvatvanshi, Duryodhana and other Kaurava warriors became enraged and involuntarily surrounded Shini's grandson from all sides. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)