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mahabharat 7.191.51: शत्रुवीरों का संहार करने वाले सात्यकि मुझे बार-बार आनन्द दे रहे हैं तथा नकुल, सहदेव, भीमसेन और राजा युधिष्ठिर को भी प्रसन्न कर रहे हैं ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.191.51 
आनन्दयति मां भूय: सात्यकि: परवीरहा।
माद्रीपुत्रौ च भीमं च राजानं च युधिष्ठिरम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
शत्रुवीरों का संहार करने वाले सात्यकि मुझे बार-बार आनन्द दे रहे हैं तथा नकुल, सहदेव, भीमसेन और राजा युधिष्ठिर को भी प्रसन्न कर रहे हैं ॥ 51॥
 
Satyaki, the slayer of enemy warriors, is giving me joy again and again and is also delighting Nakula, Sahadeva, Bhimasena and King Yudhishthira. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)