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mahabharat 7.191.43-44h: भरत! कृपाचार्य, अर्जुन, अश्वत्थामा, वैकर्तन, कर्ण, प्रद्युम्न, सात्यकि और अभिमन्यु को छोड़कर किसी के पास भी ऐसे बाण नहीं थे। 43 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.191.43-44h 
ऋते शारद्वतात् पार्थाद् द्रौणेर्वैकर्तनात् तथा॥ ४३॥
प्रद्युम्नयुयुधानाभ्यामभिमन्योश्च भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! कृपाचार्य, अर्जुन, अश्वत्थामा, वैकर्तन, कर्ण, प्रद्युम्न, सात्यकि और अभिमन्यु को छोड़कर किसी के पास भी ऐसे बाण नहीं थे। 43 1/2
 
Bharata! Except Krupacharya, Arjuna, Ashwatthama, Vaikartana, Karna, Pradyumna, Satyaki and Abhimanyu, no one else had such arrows. 43 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)