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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  7.191.38-39 
भ्रान्तमुद्‍भ्रान्तमाविद्धमाप्लुतं प्रसृतं सृतम्।
परिवृत्तं निवृत्तं च खड्गं चर्म च धारयन्॥ ३८॥
सम्पातं समुदीर्णं च दर्शयामास पार्षत:।
भारतं कौशिकं चैव सात्वतं चैव शिक्षया॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने ढाल और तलवार लेकर अपनी शिक्षा के अनुसार भ्रांत, उद्भ्रांत, अविद्ध, आपलुत, प्रसृत, शृत, परिवृत्त, निवृत्त, संपत, समुद्रदीर्ण, भरत, कौशिक और सात्वत आदि का मार्ग दिखाया। 38-39॥
 
Taking shield and sword, he showed the paths of Bhrant, Udbhrant, Aaviddha, Aaplut, Prasrit, Srit, Parivritt, Nivrutt, Sampat, Samudirna, Bharat, Kaushik and Satvat etc. according to his teachings. 38-39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)