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mahabharat 7.191.34: महाबली ब्राह्मण द्रोण के द्वारा अपने घोड़ों को मारा जाता देख पार्श्‍ववंश के महायोद्धा, समस्त योद्धाओं में श्रेष्ठ द्रुपदपुत्र द्रोण भी इसे सहन नहीं कर सके। 34.   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.191.34 
तान् हयान् निहतान् दृष्ट्वा द्विजाग्रॺेण स पार्षत:।
नामृष्यत युधां श्रेष्ठो याज्ञसेनिर्महारथ:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
महाबली ब्राह्मण द्रोण के द्वारा अपने घोड़ों को मारा जाता देख पार्श्‍ववंश के महायोद्धा, समस्त योद्धाओं में श्रेष्ठ द्रुपदपुत्र द्रोण भी इसे सहन नहीं कर सके। 34.
 
Seeing his horses being killed by the great Brahmin Drona, the great warrior of the Parshata dynasty, Drupada's son, the best among all warriors, could not bear it. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)