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mahabharat 7.191.31: जैसे मांस के टुकड़े के लोभ से बाज़ बड़े वेग से आक्रमण करता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्न युद्धभूमि में बड़े वेग से एक दूसरे पर आक्रमण करने लगे ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.191.31 
क्षिप्रं श्येनस्य चरतो यथैवामिषगृद्धिन:।
तद्वदासीदभीसारो द्रोणपार्षतयो रणे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जैसे मांस के टुकड़े के लोभ से बाज़ बड़े वेग से आक्रमण करता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्न युद्धभूमि में बड़े वेग से एक दूसरे पर आक्रमण करने लगे ॥31॥
 
Just as a hawk, greedy for a piece of meat, attacks with great speed, similarly, Dronacharya and Dhrishtadyumna attacked each other with great speed on the battlefield. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)