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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.191.29 
सोऽतिष्ठद् युगमध्ये वै युगसन्नहनेषु च।
जघनार्धेषु चाश्वानां तत् सैन्या: समपूजयन्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वह रथ के बीचोंबीच खड़ा हो गया, अपने पैर जुए की पट्टियों पर और द्रोणाचार्य के घोड़ों के पिछले हिस्से पर रख लिए। उसके इस कार्य की सभी सैनिकों ने बहुत प्रशंसा की।
 
He stood right in the middle of the chariot's yoke, placing his feet on the yoke's straps and on the hind parts of Dronacharya's horses. His action was highly praised by all the soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)