श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.191.17 
यच्चास्य बाणविकृतं धनूंषि च विशाम्पते।
सर्वं चिच्छेद दुर्धर्षो गदां खड्गं च वर्जयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! दुर्धर्ष द्रोणाचार्य ने गदा और तलवार को छोड़कर धृष्टद्युम्न के सभी तीर, तरकश और धनुष आदि काट दिये।
 
Prajanath! Durdharsha Dronacharya cut off all the arrows, quiver and bow etc. of Dhrishtadyumna except the mace and the sword.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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