Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.191.10-11: बाणों के समाप्त हो जाने के कारण, नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों के प्रकट न होने के कारण, पुत्र शोक से पीड़ित हुए द्रोणाचार्य ऋषियों की आज्ञा मानकर अब शस्त्र त्यागने को तैयार हो गए; इसीलिए वे यशस्वी होने पर भी पहले के समान युद्ध नहीं करते थे॥10-11॥ | mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स शरक्षयमासाद्य पुत्रशोकेन चार्दित:।
विविधानां च दिव्यानामस्त्राणामप्रसादत:॥ १०॥
उत्स्रष्टुकाम: शस्त्राणि ऋषिवाक्यप्रचोदित:।
तेजसा पूर्यमाणश्च युयुधे न यथा पुरा॥ ११॥
अनुवाद
बाणों के समाप्त हो जाने के कारण, नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों के प्रकट न होने के कारण, पुत्र शोक से पीड़ित हुए द्रोणाचार्य ऋषियों की आज्ञा मानकर अब शस्त्र त्यागने को तैयार हो गए; इसीलिए वे यशस्वी होने पर भी पहले के समान युद्ध नहीं करते थे॥10-11॥
Due to the exhaustion of arrows, Dronacharya, who was suffering from grief for his son, due to the non-appearance of various types of divine weapons, obeyed the orders of the sages and now got ready to lay down his arms; That is why even though he was full of glory, he did not fight like before. 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥