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mahabharat 7.190.9: द्रोणाचार्य के बाणों से कुन्तीपुत्रों को पीड़ित और भयभीत देखकर उनके कल्याण में लगे हुए बुद्धिमान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से इस प्रकार कहा - 9॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.190.9 
त्रस्तान् कुन्तीसुतान् दृष्ट्वा द्रोणसायकपीडितान्।
मतिमान् श्रेयसे युक्त: केशवोऽर्जुनमब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के बाणों से कुन्तीपुत्रों को पीड़ित और भयभीत देखकर उनके कल्याण में लगे हुए बुद्धिमान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से इस प्रकार कहा - 9॥
 
Seeing Kunti's sons suffering and frightened by the arrows of Dronacharya, the wise Lord Krishna, engaged in their welfare, said to Arjun thus - 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)