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mahabharat 7.190.8: रणभूमि में कोई भी दूसरा योद्धा उसकी ओर देखने में भी समर्थ नहीं है (युद्ध करने की तो बात ही दूर है) और धर्म को जानने वाला अर्जुन भी उसके साथ (एकाग्रचित्त होकर) कभी युद्ध नहीं करेगा॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.190.8 
न चैनं संयुगे कश्चित् समर्थ: प्रतिवीक्षितुम्।
न चैनमर्जुनो जातु प्रतियुध्येत धर्मवित्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में कोई भी दूसरा योद्धा उसकी ओर देखने में भी समर्थ नहीं है (युद्ध करने की तो बात ही दूर है) और धर्म को जानने वाला अर्जुन भी उसके साथ (एकाग्रचित्त होकर) कभी युद्ध नहीं करेगा॥8॥
 
No other warrior on the battlefield is even capable of looking at him (let alone fighting him) and Arjuna, the knower of Dharma, will never fight with him (with full attention)'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)