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mahabharat 7.190.6: महाराज! युद्धभूमि में घोड़ों और मानव योद्धाओं का महान संहार देखकर पाण्डवों की विजय की आशा समाप्त हो गयी।   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.190.6 
दॄष्ट्वाश्वनरयोधानां विपुलं च क्षयं युधि।
पाण्डवेया महाराज नाशशंसुर्जयं तदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! युद्धभूमि में घोड़ों और मानव योद्धाओं का महान संहार देखकर पाण्डवों की विजय की आशा समाप्त हो गयी।
 
Maharaj! Seeing the great destruction of horses and human warriors on the battlefield, the Pandavas lost their hopes of victory.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)