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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.190.54 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा कृष्णवाक्यप्रचोदित:।
भावित्वाच्च महाराज वक्तुं समुपचक्रमे॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! भीम की यह बात सुनकर श्रीकृष्ण की आज्ञा से प्रेरित होकर राजा युधिष्ठिर झूठ बोलने को तैयार हो गए॥54॥
 
Maharaj! On hearing this from Bhima, inspired by Shri Krishna's orders, King Yudhishthira became ready to tell the lie. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)