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mahabharat 7.190.53: हे राजन! हे देवों के स्वामी! आपके ऐसा कहने पर ब्राह्मणश्रेष्ठ द्रोणाचार्य कभी युद्ध नहीं करेंगे; क्योंकि आप तीनों लोकों में सत्यवादी के रूप में विख्यात हैं।॥53॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.190.53 
त्वयोक्तो नैव युध्येत जातु राजन् द्विजर्षभ:।
सत्यवान् हि त्रिलोकेऽस्मिन् भवान् ख्यातो जनाधिप॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे देवों के स्वामी! आपके ऐसा कहने पर ब्राह्मणश्रेष्ठ द्रोणाचार्य कभी युद्ध नहीं करेंगे; क्योंकि आप तीनों लोकों में सत्यवादी के रूप में विख्यात हैं।॥53॥
 
O King! O lord of all gods! On your saying so, the best of the Brahmins, Drona, will never fight; because you are renowned in all the three worlds as a truthful person.' ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)