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mahabharat 7.190.5: जब युद्ध में महामनस्वी द्रोणाचार्य के द्वारा पांचाल सैनिक मारे जाने लगे और आचार्य द्रोण के अस्त्र-शस्त्र निरन्तर बरसने लगे, तब पाण्डव भय से भर गए॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.190.5 
वध्यमानेषु संग्रामे पञ्चालेषु महात्मना।
उदीर्यमाणे द्रोणास्त्रे पाण्डवान् भयमाविशत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब युद्ध में महामनस्वी द्रोणाचार्य के द्वारा पांचाल सैनिक मारे जाने लगे और आचार्य द्रोण के अस्त्र-शस्त्र निरन्तर बरसने लगे, तब पाण्डव भय से भर गए॥5॥
 
When in the battle the Panchala soldiers started getting killed by the great-minded Dronacharya and the weapons of Acharya Drona started raining down continuously, then the Pandavas got filled with fear. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)