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mahabharat 7.190.41: ऋषियों के ये वचन सुनकर, भीमसेन की बात पर विचार करते हुए तथा युद्धभूमि में अपने सम्मुख धृष्टद्युम्न को देखकर द्रोण दुःखी हो गए ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.190.41 
इति तेषां वच: श्रुत्वा भीमसेनवचश्च तत्।
धृष्टद्युम्नं च सम्प्रेक्ष्य रणे स विमनाऽभवत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों के ये वचन सुनकर, भीमसेन की बात पर विचार करते हुए तथा युद्धभूमि में अपने सम्मुख धृष्टद्युम्न को देखकर द्रोण दुःखी हो गए ॥ 41॥
 
On hearing these words of the sages, pondering over Bhimasena's remarks and seeing Dhrishtadyumna in front of him on the battlefield, Drona became sad. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)