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mahabharat 7.190.34: इसके साथ ही सूर्य की किरणों को पीने वाले सीकट, पृश्नि, गर्ग, वालखिल्य, भृगु, अंगिरा तथा सूक्ष्म रूपधारी अन्य महर्षि भी वहाँ आ गए ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.190.34 
सिकता: पृश्नयो गर्गा वालखिल्या मरीचिपा:।
भृगवोऽङ्गिरसश्चैव सूक्ष्माश्चान्ये महर्षय:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इसके साथ ही सूर्य की किरणों को पीने वाले सीकट, पृश्नि, गर्ग, वालखिल्य, भृगु, अंगिरा तथा सूक्ष्म रूपधारी अन्य महर्षि भी वहाँ आ गए ॥34॥
 
Along with this, Sikat, Prishni, Garga, Valakhilya, who drinks the rays of the sun, Bhrigu, Angira and other Maharshi in subtle form also came there. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)