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mahabharat 7.190.33: विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, वशिष्ठ, कश्यप और अत्रि- ये सभी लोग उन्हें ब्रह्मलोक ले जाने की इच्छा से वहाँ आये थे। 33॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.190.33 
विश्वामित्रो जमदग्निर्भरद्वाजोऽथ गौतम:।
वसिष्ठ: कश्यपोऽत्रिश्च ब्रह्मलोकं निनीषव:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, वशिष्ठ, कश्यप और अत्रि- ये सभी लोग उन्हें ब्रह्मलोक ले जाने की इच्छा से वहाँ आये थे। 33॥
 
Vishwamitra, Jamadagni, Bhardwaj, Gautam, Vashishtha, Kashyap and Atri - all these people had come there with the desire to take him to Brahmalok. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)