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mahabharat 7.190.3: राजेन्द्र! युद्धप्रिय पांचाल और महारथी संजय, युद्ध में द्रोणाचार्य के साथ युद्ध करते हुए, उनकी ओर आ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.190.3 
युध्यमाना महाराज पञ्चाला: सृञ्जयास्तथा।
द्रोणमेवाभ्ययुर्युद्धे योधयन्तो महारथा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! युद्धप्रिय पांचाल और महारथी संजय, युद्ध में द्रोणाचार्य के साथ युद्ध करते हुए, उनकी ओर आ रहे थे।
 
Rajendra! The war-loving Panchala and the great warrior Sanjaya, fighting with Dronacharya in the battle, were coming towards him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)