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mahabharat 7.190.27: युद्धभूमि में द्रोणाचार्य द्वारा मारे गए पांचाल राजा तूफान से उखड़ गए वृक्षों की तरह जमीन पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.190.27 
ते वध्यमाना: समरे भारद्वाजेन पार्थिवा:।
मेदिन्यामन्वकीर्यन्त वातनुन्ना इव द्रुमा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में द्रोणाचार्य द्वारा मारे गए पांचाल राजा तूफान से उखड़ गए वृक्षों की तरह जमीन पर गिर पड़े।
 
The Panchala kings killed by Dronacharya in the battlefield fell on the ground like trees uprooted by a storm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)