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mahabharat 7.190.22: इस प्रकार जब द्रोणाचार्य युद्धभूमि में आगे बढ़ रहे थे, तो बीस हजार वीर पांचाल पुरुषों ने उन पर चारों ओर से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.190.22 
तं विंशतिसहस्राणि पञ्चालानां नरर्षभा:।
तथा चरन्तं संग्रामे सर्वतोऽवाकिरञ्छरै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जब द्रोणाचार्य युद्धभूमि में आगे बढ़ रहे थे, तो बीस हजार वीर पांचाल पुरुषों ने उन पर चारों ओर से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Thus, while Dronacharya was moving in the battle-field, twenty thousand brave Panchala men began showering arrows on him from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)