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mahabharat 7.190.21: तदनन्तर वे मृत्युरूपी धृष्टद्युम्न को मार डालने की इच्छा से उस पर आक्रमण करके कंकरों से आच्छादित हजारों तीखे बाणों से उसे आच्छादित करने लगे॥21॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.190.21 
स पार्षतमभिद्रुत्य जिघांसुर्मृत्युमात्मन:।
अवाकिरत् सहस्रेण तीक्ष्णानां कङ्कपत्रिणाम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वे मृत्युरूपी धृष्टद्युम्न को मार डालने की इच्छा से उस पर आक्रमण करके कंकरों से आच्छादित हजारों तीखे बाणों से उसे आच्छादित करने लगे॥21॥
 
Then, with the desire to kill Dhrishtadyumna in his death form, they attacked him and started covering him with thousands of sharp arrows covered with pebbles. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)