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mahabharat 7.190.13-14h: महाराज! कुंतीपुत्र अर्जुन को यह बात पसंद नहीं आई, लेकिन बाकी सभी को यह विचार पसंद आया। केवल कुंतीपुत्र युधिष्ठिर ही बड़ी मुश्किल से इस पर सहमत हुए।   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.190.13-14h 
एतन्नारोचयद् राजन् कुन्तीपुत्रो धनंजय:॥ १३॥
अन्ये त्वरोचयन् सर्वे कृच्छ्रेण तु युधिष्ठिर:।
 
 
अनुवाद
महाराज! कुंतीपुत्र अर्जुन को यह बात पसंद नहीं आई, लेकिन बाकी सभी को यह विचार पसंद आया। केवल कुंतीपुत्र युधिष्ठिर ही बड़ी मुश्किल से इस पर सहमत हुए।
 
King! Kunti's son Arjun did not like this, but everyone else liked this idea. Only Kunti's son Yudhishthira agreed to this with great difficulty. 13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)