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mahabharat 7.190.12-13h: मेरा मानना ​​है कि अश्वत्थामा के मर जाने के बाद वे युद्ध नहीं कर सकते। कोई जाकर उनसे कहे कि अश्वत्थामा युद्ध में मारा गया।॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 190: द्रोणाचार्यका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.190.12-13h 
अश्वत्थाम्नि हते नैष युध्येदिति मतिर्मम॥ १२॥
तं हतं संयुगे कश्चिदस्मै शंसतु मानव:।
 
 
अनुवाद
मेरा मानना ​​है कि अश्वत्थामा के मर जाने के बाद वे युद्ध नहीं कर सकते। कोई जाकर उनसे कहे कि अश्वत्थामा युद्ध में मारा गया।॥12 1/2॥
 
‘I believe that after the death of Ashwatthama, they cannot fight. Someone should go and tell them that ‘Ashwatthama was killed in the war’.॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)