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mahabharat 7.189.63-64: पांडवों में से तीन योद्धा कुछ दुष्ट स्वभाव के थे - नकुल, सहदेव और भीमसेन। उन तीनों ने अर्जुन को पुकारा - 'अर्जुन! भागो, भागो और इन कौरवों को द्रोणाचार्य से शीघ्र ही भगा दो।' 63-64   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 63-64
 
 
श्लोक  7.189.63-64 
आसंस्तु पाण्डुपुत्राणां त्रयो जिह्मा महारथा:॥ ६३॥
यमौ च भीमसेनश्च प्राक्रोशंस्ते धनंजयम्।
अभिद्रवार्जुन क्षिप्रं कुरून् द्रोणादपानुद॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
पांडवों में से तीन योद्धा कुछ दुष्ट स्वभाव के थे - नकुल, सहदेव और भीमसेन। उन तीनों ने अर्जुन को पुकारा - 'अर्जुन! भागो, भागो और इन कौरवों को द्रोणाचार्य से शीघ्र ही भगा दो।' 63-64
 
Three of the Pandava warriors were of a somewhat wicked nature - Nakula, Sahadeva and Bhimsen. All three of them called out to Arjuna - 'Arjuna! Run, run and quickly drive away these Kauravas from Dronacharya. 63-64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)