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mahabharat 7.189.61-62h: इस प्रकार राजा युधिष्ठिर से प्रेरित होकर उन वीर योद्धाओं ने युद्ध के लिए तैयारी की और क्षत्रिय धर्म का ध्यान रखते हुए बड़ी शीघ्रता से द्रोणाचार्य पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  7.189.61-62h 
ते राज्ञा चोदिता वीरा योत्स्यमाना महारथा:॥ ६१॥
क्षात्रधर्मं पुरस्कृत्य त्वरिता द्रोणमभ्ययु:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार राजा युधिष्ठिर से प्रेरित होकर उन वीर योद्धाओं ने युद्ध के लिए तैयारी की और क्षत्रिय धर्म का ध्यान रखते हुए बड़ी शीघ्रता से द्रोणाचार्य पर आक्रमण कर दिया।
 
Thus inspired by King Yudhishthira, those valiant warriors prepared for the war and keeping the duty of a Kshatriya in mind, attacked Dronacharya with great haste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)