जयन्तो वध्यमानाश्च गतिमिष्टां गमिष्यथ।
जित्वा वा बहुभिर्यज्ञैर्यजध्वं भूरिदक्षिणै:॥ ६०॥
हता वा देवसाद् भूत्वा लोकान् प्राप्स्यथ पुष्कलान्।
अनुवाद
‘चाहे तुम विजयी हो या मारे जाओ, दोनों ही अवस्थाओं में तुम्हें श्रेष्ठता प्राप्त होगी। जीतने के पश्चात् तुम्हें बहुत-सी दक्षिणाओं सहित अनेक यज्ञ करके भगवान यज्ञपुरुष की पूजा करनी चाहिए, अथवा मारे जाने के पश्चात् तुम्हें देवता बनकर अनेक पुण्य लोकों को प्राप्त करना चाहिए।’ ॥60 1/2॥
‘Whether you are victorious or killed, you will attain the best in both cases. After winning, you should worship Lord Yagyapurusha by performing numerous sacrifices with abundant dakshina, or after being killed, you should become a god and attain many virtuous worlds.' ॥ 60 1/2 ॥