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mahabharat 7.189.55: कर्ण भीमसेन का यह पराक्रम सहन न कर सका और नाना प्रकार के बाणों तथा अनेक अस्त्र-शस्त्रों से युद्ध करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.189.55 
अमृष्यमाण: कर्णस्तु भीमसेनमयुध्यत।
विविधैरिषुजालैश्च नानाशस्त्रैश्च संयुगे॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
कर्ण भीमसेन का यह पराक्रम सहन न कर सका और नाना प्रकार के बाणों तथा अनेक अस्त्र-शस्त्रों से युद्ध करने लगा।
 
Karna could not tolerate this valour of Bhimasena. He started fighting with him on the battlefield with various types of arrows and numerous weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)