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mahabharat 7.189.53: इतना ही नहीं, महाबली भीम ने कर्ण के रथ का एक पहिया भी तोड़ डाला। परन्तु फिर भी कर्ण टूटे हुए पहिये के साथ भी पर्वतराज के समान अविचल भाव से रथ पर खड़ा रहा ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.189.53 
रथचक्रं च कर्णस्य बभञ्ज स महाबल:।
भग्नचक्रे रथेऽतिष्ठदकम्प: शैलराडिव॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, महाबली भीम ने कर्ण के रथ का एक पहिया भी तोड़ डाला। परन्तु फिर भी कर्ण टूटे हुए पहिये के साथ भी पर्वतराज के समान अविचल भाव से रथ पर खड़ा रहा ॥ 53॥
 
Not only this, the mighty Bhima even broke a wheel of Karna's chariot. But even then Karna stood on the chariot with the broken wheel as unwavering as the King of Mountains. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)