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mahabharat 7.189.52: इससे क्रोधित होकर पाण्डव पुत्र भीमसेन ने अपनी गदा उठाई और उससे युद्धस्थल में शत्रुओं के ध्वज, धनुष और सारथि को कुचल डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.189.52 
भीमसेनस्तु संक्रुद्धो गदामादाय पाण्डव:।
ध्वजं धनुश्च सूतं च सम्ममर्दाहवे रिपो:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
इससे क्रोधित होकर पाण्डव पुत्र भीमसेन ने अपनी गदा उठाई और उससे युद्धस्थल में शत्रुओं के ध्वज, धनुष और सारथि को कुचल डाला।
 
Enraged by this, Pandava son Bhimasena took up his mace and with it crushed the enemy's flag, bow and charioteer on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)