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mahabharat 7.189.5: इस प्रकार अपने बाणों से दु:शासन को भगाकर तथा उस पर हजारों बाणों की वर्षा करके धृष्टद्युम्न ने पुनः युद्धभूमि में द्रोणाचार्य पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.189.5 
स तु दु:शासनं बाणैर्विमुखीकृत्य पार्षत:।
किरन् शरसहस्राणि द्रोणमेवाभ्ययाद् रणे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने बाणों से दु:शासन को भगाकर तथा उस पर हजारों बाणों की वर्षा करके धृष्टद्युम्न ने पुनः युद्धभूमि में द्रोणाचार्य पर आक्रमण किया।
 
Thus, having chased Dushasan away with his arrows and showered thousands of arrows on him, Dhrishtadyumna once again attacked Dronacharya on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)