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mahabharat 7.189.48: उन दोनों के हजारों बाणों से पृथ्वी आच्छादित हो गई और बाणों के कारण आकाश में पक्षियों का विचरण भी बंद हो गया ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.189.48 
तयो: शरसहस्रैश्च संछन्नं वसुधातलम्।
अगम्यरूपं च शरैराकाशं समपद्यत॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों के हजारों बाणों से पृथ्वी आच्छादित हो गई और बाणों के कारण आकाश में पक्षियों का विचरण भी बंद हो गया ॥48॥
 
The earth was covered with thousands of arrows of both of them and due to the arrows, even the birds stopped moving around in the sky. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)