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mahabharat 7.189.42: तब दुर्योधन ने बड़े बल से धनुष से उसकी नोक तक छोड़े हुए, शिला पर चमकाए हुए, सुवर्णमय पंख वाले तिहत्तर बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.189.42 
सात्यकिं च त्रिसप्तत्या पीडयामास वेगित:।
स्वर्णपुङ्खै: शिलाधौतैराकर्णापूर्णनि:सृतै:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तब दुर्योधन ने बड़े बल से धनुष से उसकी नोक तक छोड़े हुए, शिला पर चमकाए हुए, सुवर्णमय पंख वाले तिहत्तर बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया।
 
Then Duryodhana with great force afflicted Satyaki with seventy-three arrows having golden feathers, polished on a rock, which were shot from the bow till its tip.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)