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mahabharat 7.189.36-37h: तत्पश्चात् क्रोधित दुर्योधन ने अपना धनुष पूरी तरह खींच लिया और दस बाण चलाकर योद्धा सात्यकि को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.189.36-37h 
तत: पूर्णायतोत्सृष्टै: सात्वतं युद्धदुर्मदम्॥ ३६॥
दुर्योधन: प्रत्यविध्यत् कुपितो दशभि: शरै:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोधित दुर्योधन ने अपना धनुष पूरी तरह खींच लिया और दस बाण चलाकर योद्धा सात्यकि को घायल कर दिया।
 
Thereafter, an enraged Duryodhana pulled his bow fully and shot ten arrows, wounding the warrior Satyaki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)