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mahabharat 7.189.33-34h: इस प्रकार दुर्योधन के प्रश्न का स्पष्ट उत्तर देकर सात्यकि बिना किसी हिचकिचाहट के आगे बढ़ गया; उसने अपने प्रति कोई दया नहीं दिखाई।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.189.33-34h 
इत्येवं व्यक्तमाभाष्य प्रतिभाष्य च सात्यकि:॥ ३३॥
अभ्ययात् तूर्णमव्यग्रो दयां नाकुरुतात्मनि।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार दुर्योधन के प्रश्न का स्पष्ट उत्तर देकर सात्यकि बिना किसी हिचकिचाहट के आगे बढ़ गया; उसने अपने प्रति कोई दया नहीं दिखाई।
 
Having thus answered Duryodhana's question clearly, Satyaki advanced forward without any hesitation; he showed no mercy towards himself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)