संजय उवाच
तं तथावादिनं तत्र राजानं माधवोऽब्रवीत्॥ ३०॥
एवंवृत्तं सदा क्षात्रं युध्यन्तीह गुरूनपि।
यदि तेऽहं प्रियो राजन् जहि मां मा चिरं कृथा:॥ ३१॥
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! सात्यकि ने ऐसी बात कहने वाले राजा दुर्योधन से कहा - 'राजन् ! क्षत्रियों की सनातन रीति यही है कि वे अपने से बड़ों से भी युद्ध करते हैं। यदि मैं आपको प्रिय हूँ तो मुझे शीघ्र ही मार डालिए, विलम्ब न कीजिए ॥ 30-31॥
Sanjaya says - Maharaj! Satyaki said to king Duryodhan who had said such a thing - 'King! The eternal custom of the Kshatriyas is such that they fight even with their elders. If I am dear to you then kill me quickly, do not delay. ॥ 30-31॥