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mahabharat 7.189.30-31: संजय कहते हैं - महाराज ! सात्यकि ने ऐसी बात कहने वाले राजा दुर्योधन से कहा - 'राजन् ! क्षत्रियों की सनातन रीति यही है कि वे अपने से बड़ों से भी युद्ध करते हैं। यदि मैं आपको प्रिय हूँ तो मुझे शीघ्र ही मार डालिए, विलम्ब न कीजिए ॥ 30-31॥   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  7.189.30-31 
संजय उवाच
तं तथावादिनं तत्र राजानं माधवोऽब्रवीत्॥ ३०॥
एवंवृत्तं सदा क्षात्रं युध्यन्तीह गुरूनपि।
यदि तेऽहं प्रियो राजन् जहि मां मा चिरं कृथा:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! सात्यकि ने ऐसी बात कहने वाले राजा दुर्योधन से कहा - 'राजन् ! क्षत्रियों की सनातन रीति यही है कि वे अपने से बड़ों से भी युद्ध करते हैं। यदि मैं आपको प्रिय हूँ तो मुझे शीघ्र ही मार डालिए, विलम्ब न कीजिए ॥ 30-31॥
 
Sanjaya says - Maharaj! Satyaki said to king Duryodhan who had said such a thing - 'King! The eternal custom of the Kshatriyas is such that they fight even with their elders. If I am dear to you then kill me quickly, do not delay. ॥ 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)