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mahabharat 7.189.3: महाराज! एक ही क्षण में धृष्टद्युम्न के बाणों की ऐसी वर्षा हुई कि दु:शासन का रथ ध्वजा और सारथि सहित लुप्त हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.189.3 
क्षणेन स रथस्तस्य सध्वज: सहसारथि:।
नादृश्यत महाराज पार्षतस्य शरैश्चित:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! एक ही क्षण में धृष्टद्युम्न के बाणों की ऐसी वर्षा हुई कि दु:शासन का रथ ध्वजा और सारथि सहित लुप्त हो गया।
 
Maharaj! In a single moment, such a shower of arrows of Dhrishtadyumna was created that Dushasan's chariot along with its flag and charioteer vanished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)