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क्षणेन स रथस्तस्य सध्वज: सहसारथि:।
नादृश्यत महाराज पार्षतस्य शरैश्चित:॥ ३॥
अनुवाद
महाराज! एक ही क्षण में धृष्टद्युम्न के बाणों की ऐसी वर्षा हुई कि दु:शासन का रथ ध्वजा और सारथि सहित लुप्त हो गया।
Maharaj! In a single moment, such a shower of arrows of Dhrishtadyumna was created that Dushasan's chariot along with its flag and charioteer vanished.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥