श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.189.29-30h 
किं नु नो विद्यते कृत्यं धनेन धनलिप्सया॥ २९॥
यत्र युध्यामहे सर्वे धनलोभात् समागता:।
 
 
अनुवाद
धन से या धन पाने की इच्छा से हमारा क्या लेना-देना? हम सब यहाँ धन के लोभ से ही संघर्ष कर रहे हैं ॥29 1/2॥
 
What do we have to do with money or the desire to get money? We are all here struggling together because of the greed for money. ॥ 29 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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