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mahabharat 7.189.28-29h: दुर्योधन बोला, "हे महाबली शिनिप्रवर! हमारा वह बाल्यकाल का खेल कहाँ चला गया और यह युद्ध कहाँ से आ गया? हाय! काल का अतिक्रमण करना अत्यन्त कठिन है।"   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.189.28-29h 
दुर्योधन उवाच
क्व सा क्रीडा गतास्माकं बाल्ये वै शिनिपुङ्गव॥ २८॥
क्व च युद्धमिदं भूय: ‘कालो हि दुरतिक्रम:’।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन बोला, "हे महाबली शिनिप्रवर! हमारा वह बाल्यकाल का खेल कहाँ चला गया और यह युद्ध कहाँ से आ गया? हाय! काल का अतिक्रमण करना अत्यन्त कठिन है।"
 
Duryodhana said, "O great Shinipravar! Where did that game of our childhood go and from where did this war come? Alas! It is extremely difficult to transgress time." 28 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)