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mahabharat 7.189.24: शिनिप्रवर! इन क्रोध, लोभ आदि के वशीभूत होकर आप मुझे अपने बाणों का लक्ष्य बनाते हैं और मैं आपको। वास्तव में आप मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं और मैं भी सदैव आपका प्रिय रहा हूँ॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.189.24 
यत्र मामभिसंधत्से त्वां चाहं शिनिपुङ्गव।
त्वं हि प्राणै: प्रियतरो ममाहं च सदा तव॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शिनिप्रवर! इन क्रोध, लोभ आदि के वशीभूत होकर आप मुझे अपने बाणों का लक्ष्य बनाते हैं और मैं आपको। वास्तव में आप मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं और मैं भी सदैव आपका प्रिय रहा हूँ॥ 24॥
 
Shinipravar! Under the influence of these anger, greed etc. you make me the target of your arrows and I you. Actually you have been dearer to me than my life and I have also always been your favourite.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)