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mahabharat 7.189.23: हे मित्र! क्रोध को धिक्कार है, लोभ को धिक्कार है, मोह को धिक्कार है, ईर्ष्या को धिक्कार है, इस क्षत्रिय-समान आचरण को धिक्कार है और दुष्ट शक्ति को भी धिक्कार है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.189.23 
धिक् क्रोधं धिक् सखे लोभं धिङ्मोहं धिगमर्षितम्।
धिगस्तु क्षात्रमाचारं धिगस्तु बलमौरसम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मित्र! क्रोध को धिक्कार है, लोभ को धिक्कार है, मोह को धिक्कार है, ईर्ष्या को धिक्कार है, इस क्षत्रिय-समान आचरण को धिक्कार है और दुष्ट शक्ति को भी धिक्कार है॥ 23॥
 
Friend! Shame on anger, shame on greed, shame on attachment, shame on envy, shame on this Kshatriya-like behaviour and shame on even the evil power.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)