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mahabharat 7.189.22: तत्पश्चात् राजा दुर्योधन ने उसके आचरण की निरन्तर निन्दा करते हुए अपने प्रिय मित्र सत्य से यह कहा : 22॥   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.189.22 
अथ दुर्योधनो राजा सात्यकिं समभाषत।
प्रियं सखायं सततं गर्हयन् वृत्तमात्मन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा दुर्योधन ने उसके आचरण की निरन्तर निन्दा करते हुए अपने प्रिय मित्र सत्य से यह कहा : 22॥
 
Thereafter, King Duryodhana, continuously criticizing his behavior, said this to his dear friend Satya: 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)