श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  7.189.19-20 
तं सात्यकि: शीघ्रतरं पुनरेवाभ्यवर्तत॥ १९॥
तौ परस्परमासाद्य समीपे कुरुमाधवौ।
हसमानौ नृशार्दूलावभीतौ समसज्जताम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर सात्यकि बड़ी फुर्ती से दुर्योधन के सामने आये। वे दोनों ही नरसिंहों के समान पराक्रमी थे। कुरुवंशी दुर्योधन और मधुवंशी सात्यकि एक-दूसरे को निकट पाकर निर्भय हो गए और हँसते हुए युद्ध करने लगे॥19-20॥
 
Seeing this Satyaki came in front of Duryodhan very quickly. Both of them were as powerful as lions among men. Kuruvanshi Duryodhan and Madhuvanshi Satyaki, finding each other near, became fearless and started fighting smilingly.॥19-20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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