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mahabharat 7.189.16: वहाँ रुके हुए चारों वीर सिंह-शिरोमणि पाण्डवों से इस प्रकार जूझने लगे, मानो प्रचण्ड वायु दो पर्वतों से टकरा रही हो।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.189.16 
निवारितास्तु ते वीरास्तयो: पुरुषसिंहयो:।
समसज्जन्त चत्वारो वाता: पर्वतयोरिव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रुके हुए चारों वीर सिंह-शिरोमणि पाण्डवों से इस प्रकार जूझने लगे, मानो प्रचण्ड वायु दो पर्वतों से टकरा रही हो।
 
The four heroes who were stopped there grappled with the two lion-maned Pandavas as if the strong winds were clashing with two mountains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)