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mahabharat 7.189.12: न तो तीरों का प्रयोग किया गया, न भैंस की हड्डियों से बने तीरों का, न गाय की हड्डियों से बने तीरों का, न हाथी की हड्डियों से बने तीरों का, न दो फलकों या कांटों वाले तीरों का, न दुर्गन्ध वाले तीरों का और न जीभ पर मुड़े हुए तीरों का।   |   mahabharat अध्याय 7.189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.189.12 
न सूची कपिशो नैव न गवास्थिर्गजास्थिज:।
इषुरासीन्न संश्लिष्टो न पूतिर्न च जिह्मग:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
न तो तीरों का प्रयोग किया गया, न भैंस की हड्डियों से बने तीरों का, न गाय की हड्डियों से बने तीरों का, न हाथी की हड्डियों से बने तीरों का, न दो फलकों या कांटों वाले तीरों का, न दुर्गन्ध वाले तीरों का और न जीभ पर मुड़े हुए तीरों का।
 
Neither the arrows,4 nor the ones made of the bones of a buffalo,5 nor those made of the bones of a cow,6 nor those made of the bones of an elephant,7 nor those having two blades or thorns,7 nor those with a foul smell and7 nor those which bent at the tongue were used.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)