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mahabharat 7.188.47: महाराज! उन दोनों महारथियों को देखकर आकाश में छिपे हुए और दृश्यरूपी सभी प्राणी यही कह रहे थे॥47॥   |   mahabharat अध्याय 7.188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.188.47 
इत्यब्रुवन् महाराज दृष्ट्वा तौ पुरुषर्षभौ।
अन्तर्हितानि भूतानि प्रकाशानि च सर्वश:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उन दोनों महारथियों को देखकर आकाश में छिपे हुए और दृश्यरूपी सभी प्राणी यही कह रहे थे॥47॥
 
Maharaj! Seeing those two great warriors, all the creatures hidden in the sky as well as those visible were saying the same thing. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)