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mahabharat 7.188.41-42: यह युद्ध न तो मनुष्यों का है, न दैत्यों का, न राक्षसों का, न देवताओं और गन्धर्वों का। यह निश्चय ही ब्राह्मणों का सर्वश्रेष्ठ युद्ध है। ऐसा विचित्र और विस्मयकारी युद्ध हमने न कभी देखा है, न सुना है॥ 41-42॥   |   mahabharat अध्याय 7.188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  7.188.41-42 
नैवेदं मानुषं युद्धं नासुरं न च राक्षसम्॥ ४१॥
न दैवं न च गान्धर्वं ब्राह्मं ध्रुवमिदं परम्।
विचित्रमिदमाश्चर्यं न नो दृष्टं न च श्रुतम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
यह युद्ध न तो मनुष्यों का है, न दैत्यों का, न राक्षसों का, न देवताओं और गन्धर्वों का। यह निश्चय ही ब्राह्मणों का सर्वश्रेष्ठ युद्ध है। ऐसा विचित्र और विस्मयकारी युद्ध हमने न कभी देखा है, न सुना है॥ 41-42॥
 
‘This war is neither of humans, nor of demons, nor of monsters, nor of gods and Gandharvas. This is certainly the best of Brahman wars. We have never seen or heard of such a strange and astonishing war.॥ 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)